रेंगाखार (कबीरधाम)। किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए ₹2 करोड़ 24 लाख 10 हजार की लागत से निर्मित रेंगाखार जलाशय की सीसी लाइनिंग नहर निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद सवालों के घेरे में आ गई है। नहर की दीवार में कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों में चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो बारिश के दौरान नहर का क्षतिग्रस्त हिस्सा बह सकता है और आने वाले सिंचाई सीजन में हजारों किसानों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

स्थल पर लगे विभागीय सूचना बोर्ड के अनुसार यह कार्य छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा कराया गया है। परियोजना की अनुबंध राशि ₹224.10 लाख (₹2.24 करोड़) है। कार्य का आदेश 26 जून 2025 को जारी किया गया था तथा निर्माण कार्य 26 मार्च 2026 को पूर्ण किया गया। बोर्ड के अनुसार इस कार्य का ठेका मेसर्स बृजकिशोर अग्रवाल, अनुपमनगर, रायपुर को दिया गया था, जबकि कार्य की निगरानी कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन संभाग, कवर्धा के अधीन रही।

रेंगाखार क्षेत्र में कई बार पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसान धान की खेती के लिए इस जलाशय की नहर पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में नई नहर में निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद दरारें दिखाई देना किसानों की चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी नहर में इतनी जल्दी दरारें दिखाई देना निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि दरारों का वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

किसानों के अनुसार यदि अभी से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत नहीं कराई गई तो बारिश के तेज बहाव में नहर को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में जलाशय का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाएगा, जिससे धान की फसल प्रभावित होगी। किसानों का कहना है कि यह नहर केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और पूरे वर्ष की मेहनत का आधार है।

ग्रामीणों ने कलेक्टर कबीरधाम, जल संसाधन विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि नहर का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, दरारों के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा क्षतिग्रस्त हिस्से की शीघ्र मरम्मत कराई जाए। यदि जांच में निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई सिंचाई परियोजना किसानों के हित में है। ऐसे में निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद नहर में दरारें दिखाई देना गंभीर चिंता का विषय है। समय रहते मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं हुई तो इसका खामियाजा क्षेत्र के हजारों किसानों को भुगतना पड़ सकता है।
(नोट: यह समाचार स्थल पर उपलब्ध सूचना बोर्ड, प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रही स्थिति तथा स्थानीय ग्रामीणों एवं किसानों द्वारा व्यक्त चिंताओं पर आधारित है। दरारों के वास्तविक कारण का निर्धारण तकनीकी जांच के बाद ही संभव होगा। संबंधित विभाग एवं ठेकेदार का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
