रायपुर, 23 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने 20 नवंबर को राज्य सेवा परीक्षा (SSE) 2024 का अंतिम परिणाम घोषित किया। इस परीक्षा में अनुसूचित जनजाति (ST) महिला वर्ग में पहला स्थान हासिल करने वाली बेमेतरा जिले की रहने वाली कुमारी राधिका कुंजाम ने सबके दिल जीत लिए। राधिका के पिता रामसिंह कुंजाम स्थानीय बाजार में सब्जी का ठेला लगाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण होने के बावजूद राधिका ने अपनी लगन और मेहनत से न सिर्फ़ ST महिला कैटेगरी में टॉप किया, बल्कि कुल मिलाकर ऑल कैटेगरी में भी 12वां रैंक हासिल किया है।

पढ़ाई में शुरू से अव्वल
राधिका ने 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं में जिला स्तर पर मेरिट सूची में स्थान बनाया था। 10वीं में उन्होंने 94.5% और 12वीं में 92.8% अंक प्राप्त किए थे। ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाली राधिका ने हमेशा कहा कि “पापा की मेहनत मेरी प्रेरणा है। मैं उनके लिए कुछ करना चाहती थी।”
रोज़ सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई, शाम को पापा की मदद
राधिका बताती हैं, “पापा सुबह 5 बजे सब्जी लेकर बाजार जाते थे। मैं 4 बजे उठकर पढ़ाई करती थी। शाम को घर आने के बाद ठेले पर उनकी मदद करती थी। कोचिंग का खर्चा नहीं था, इसलिए यूट्यूब, फ्री ऑनलाइन पीडीएफ और लाइब्रेरी की किताबों से ही तैयारी की।” उनकी मां घरों में बर्तन और झाड़ू-पोछा का काम करके परिवार का सहारा बनती थीं।
CGPSC में शानदार प्रदर्शन
- प्री में 168 अंक (ST कटऑफ से काफी ऊपर)
- मेन्स में 742 अंक
- इंटरव्यू में 115 अंक
- कुल अंक: 857 (ST महिला में पहला स्थान, ओवरऑल 12वां रैंक)
राधिका को डिप्टी कलेक्टर या डिप्टी एसपी जैसे बड़े पद मिलने की पूरी संभावना है।
पिता की आंखों में आंसू, गांव में खुशी की लहर
परिणाम आने के बाद जब राधिका घर पहुंचीं तो पिता रामसिंह भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी बेटी इतना बड़ा मुकाम हासिल करेगी। अब मैं गर्व से कह सकता हूं कि मेरी बेटी अफसर बनेगी।”
गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत हुआ। स्थानीय विधायक और कलेक्टर ने भी राधिका को बधाई दी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्वीट कर लिखा, “राधिका कुंजाम जैसी बेटियां हमारा गौरव हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कोई बाधा बाधा नहीं बन सकती।”
राधिका अब दूसरे युवाओं को संदेश दे रही हैं, “पैसे या कोचिंग की कमी कोई बहाना नहीं है। बस लगन और ईमानदारी से मेहनत करो, सफलता ज़रूर मिलेगी।”
राधिका कुंजाम की यह कहानी छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है।
सच में, सपनों को पंख तभी मिलते हैं जब मेहनत के पांव मज़बूत हों।
