नई दिल्ली। भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात दिसंबर 2025 में तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुँचने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और शिपिंग डेटा के अनुसार, दिसंबर में भारत रोजाना केवल 6 से 6.5 लाख बैरल रूसी क्रूड खरीदेगा, जबकि अभी नवंबर में यह आँकड़ा करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन था।

इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य कारण हैं:
अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा रूस पर लगाए नए प्रतिबंध
रूसी तेल के परिवहन करने वाले जहाज़ों और शिपिंग कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध G7 देशों की मूल्य सीमा (प्राइस कैप) का सख्ती से पालन भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधों के डर से कई शिपिंग कंपनियाँ रूसी तेल भारत लाने से बच रही हैं। नतीजतन, रूस से सस्ता तेल मिलना अब मुश्किल हो गया है।
रिफाइनर्स अब तेज़ी से वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहे हैं, जिसमें मध्य-पूर्व (सऊदी अरब, इराक, UAE), अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देश शामिल हैं।यह बदलाव भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से नई चुनौती है, क्योंकि 2022-24 के दौरान रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था और सस्ते रूसी तेल से भारत को अरबों डॉलर की बचत हुई थी।
सरकार और रिफाइनरी कंपनियाँ स्थिति पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं।
