रायपुर: छत्तीसगढ़ में कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए शिक्षा विभाग ने अब शिक्षकों को ही मैदान में उतार दिया है। बस्तर और कुछ अन्य जिलों में कुत्ता पकड़ने की जिम्मेदारी अब प्राथमिक और माध्यमिक शाला के शिक्षकों के कंधों पर डाल दी गई है।जिला शिक्षा अधिकारियों के आदेश में साफ लिखा है कि “स्कूल परिसर और आसपास आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से बच्चों की सुरक्षा को खतरा है, इसलिए शिक्षकगण ग्राम पंचायत /नगर पालिका/पंचायत की टीम के साथ मिलकर कुत्ता पकड़ने के अभियान में सहयोग करेंगे।” इसमें शिक्षकों को सुबह-शाम ड्यूटी तक लगाने की बात कही गई है। शिक्षक संगठनों ने इसे “शिक्षा का अपमान” बताते हुए कड़ा विरोध जताया है छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा, “बच्चों को पढ़ाना हमारा काम है, कुत्ता पकड़ना नहीं। पहले बस्तर में बंदूक चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी, अब कुत्ता पकड़ने की ड्यूटी! आखिर शिक्षकों से और क्या-क्या करवाया जाएगा?”

वहीं विपक्षी कांग्रेस ने इसे भूपेश बघेल सरकार पर हमला बोलने का मौका मान लिया। पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव ने तंज कसा, “साहब, शिक्षक भर्ती नहीं हो रही, जो हैं उन्हें कुत्ता पकड़वा रहे हो। अगला आदेश शायद शेर पकड़ने का आएगा!”

अधिकारी इसे “जनसुरक्षा का हिस्सा” बता रहे हैं, लेकिन शिक्षक समुदाय में गुस्सा सातवें आसमान पर है। सोशल मीडिया पर #TeacherNahiKuttaPakadneWale ट्रेंड करने लगा है।
अब सवाल यह है – कक्षा में पढ़ाने वाले हाथ में किताब की जगह जाली और रस्सी थामेंगे? यह सिलसिला कब तक चलेगा?
